शिव ही सत्य है शिव ही सुन्दर है
शिव को हम सब कल्याणकारी मनाते हैं साथ ही शिव ही सत्य है शिव ही सुन्दर है इस सच को सब स्वीकार करते हैं हमें शिव का बोध हो जाये तो हमें अपने जीवन से मुक्ति प्राप्त हो सकती है।
धर्म अनेक है पर सभी की समान मान्यता है ईश्वर एक है। ईश्वर एक है जिनका हम स्मरण करते हैं जिनकी हम पूजा अर्चना करते हैं जो पूरे संसार का रचियता है। जो हमारे परमपिता परमात्मा शिव हैं। एक मात्र शिव हैं जो ब्रम्हा विष्णु शंकर के भी रचियता है। जीवन मरण से परे शिव है न जिनका जन्म होता है न कभी उनका मरण होता शिव अजर अमर है हम शिव को देवों के देव महादेव कहते है शिव परमशक्ति के मालिक है।
शिव ज्योति बिन्दू स्वरूप है वास्तव में शिव ऐसा शब्द है जिसके उच्चारण स्मरण मात्र से ईश्वर की अनुभूति होती है शिव नाम से हमें परमशांति प्राप्त होती है।



समस्त देवी देवताओं में शिव ही ऐसे देव हैं जिन्हें हम देवों के देव महादेव कहते हैं जिन्हें हम त्रिकालदर्शी कहते हैं। परमात्मा शिव ही निराकारी हैं जिनको हम ज्योति बिन्दु स्वरूप में पूजा अर्चना करते हैं। परमात्मा सब आत्मा से न्यारा और प्यारा है जो अजर अमर है। जो देह से परे हैं जिसका न जन्म होता न मरण होता है अर्थात जो अजर अमर है। जो परमधाम का वासी हैं जो वहां से सारे संसार का पोषक है उसके बिना एक पत्ता भी हिल नहीं सकता है। दुनियाभर में ज्योतिलिंग के रूप में शिव की पूजा अर्चना आराधना की जाती है। शिवलिंग को ही ज्योतिलिंग के रूप में परमात्मा का स्वरूप माना जाता है।

शिव परमात्मा ऐसी शक्ति है जिस से भगवान ने भी शक्ति प्राप्त की थी। चित्रों में सभी भगवान शिव से शक्ति प्राप्त करते प्रतीत होते हैं सभी देवताओं ने शिव से शक्ति प्राप्त की। शिव व शंकर दोनों अलग अलग हैं शिव परमपिता परमात्मा हैं। नाम अलग अलग है पर पूरी कायनात का एक मालिक शिव है।
सृष्टि की प्रक्रिया का अध्ययन करें तो सृष्टि के प्रारंभ में ईश्वर की आत्मा पानी पर डोलती थी आदिकाल में परमात्मा ने आदम व हव्वा को बनाया जिनके द्वारा स्वर्ग का निर्माण हुआ। एक सवाल हम सब जानना चाहते हैं परमात्मा है तो कहां है क्या उनका साक्षात्कार हो सकता है। यह भी सवाल उठता है आत्मायें शरीर में आने से पहले कहाँ रहती है फिर शरीर छोड़कर कहां चलीं जाती है। इन सवालों के जवाब सहज है सृष्टि के च्रक में तीन लोक होते हैं। पहला स्थूल वतन दूसरा सूक्ष्म वतन तीसरा मूल वतन जिसको हम परमधाम भी कहते हैं जहां महादेव शिव रहते हैं।
स्थूल वतन जिसमें हम निवास करते हैं  हमारा निर्माण पांच तत्वों से मिलकर बना है। स्थूल वतन को कर्म क्षेत्र भी कहां जाता है। जहां जन्म मरण होता है मनुष्य को कर्म के अनुसार फल मिलते हैं। इसके बाद सूक्ष्म वतन है जो सूर्य चांद तारों के पार है जिसे हम ब्रम्हा विष्णु महेश के निवास के रूप में जानते हैं। सूक्ष्म वतन के बाद मूल वतन है जिसे हम परमधाम भी कहते हैं। यह वह स्थान है जहां पर परमात्मा निवास करते हैं यह वहीं धाम है जहां सभी आत्माओं का परमधाम है। यहाँ से ही आत्माओं का आवागमन होता है यहां से आत्माएं अपने कर्मोंनुसार स्थूल धाम में आवागमन करती है।

आत्माओं का जन्म होता है परमात्मा का अवतरण होता है। यही आत्मा और परमात्मा में अंतर है। आत्मा देह धारण होती है जबकि परमात्मा देह से परे हैं। परमात्मा निराकार है ज्योति बिंदु स्वरूप है। जो सभी आत्माओं को प्रकाशमान करते हैं। वह हमें पतित से पावन बनाता है। परमात्मा तभी अवतरित होते हैं जब सब जगह अंधकार होता है।
विकारों की अंधकार रूपी रात्रि को दूर कर पवित्र पावन सत्य से प्रकाशमय करते हैं इसलिए शिव अवतरित होते हैं जिसे हम शिव रात्रि कहते हैं।


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