"नेताओं को सैनिकों के परिवार के आंसुओं से कोई मतलब नहीं होता है"
कैप्टन अजय महीने भर से बहुत व्यस्त था। कई दिनों बाद उसे समय मिला उसने सोचा वह अपने मन कुछ करें। रोज आतंकवादी घटनाओं से उसका मन बहुत विचलित रहता था। इस महिने वह बहुत व्यस्त था इसलिए जागते समय तो नहीं लेकिन सोते समय वह मित्र बहुत याद आते थे जो अभी ही आतंकवादियों के हाथ शहीद हो गयें। सोते समय उन मित्रों के चेहरे नजरों के सामने नजर आने लग जाते थे।




जब सब छात्र मेडिकल व इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा का इंतजार कर रहें थे। उस वक्त अजय एनडीए परीक्षा परिणाम का बेसब्री से इंतजार कर रहा था। हालांकि मां की खुशी के लिए अन्य प्रवेश परीक्षा भी अजय ने दी थी मां नहीं चाहती थी मैं सेना में शामिल हों हर मां चाहती है उसका बेटा सुरक्षित उसके पास रहें। लिखित परीक्षा के बाद साक्षात्कार के बाद भी एनडीए में प्रवेश होता था।
मां नहीं चाहती थी मैं सेना का हिस्सा बनों इसलिए उन्होंने शर्त रखी मुझे एक ही बार एनडीए परीक्षा देने का अवसर दिया जायेगा। कोई भी मां सहमत नहीं हो सकती वह अपने इकलौते बेटे को सेना में भेज दें। मां को सोचना था कई लाखों छात्रों में  मेरा चुनाव होना असंभव है इसलिए मुझे एक अवसर दिया गया।

यहां पर हर कैडेट की यही कहानी है किस की मां अपने कलेजे के टुकड़े को गोलियों के सामने छोड़ने के लिए तैयार होगी। जब अजय का एनडीए में चुनाव हों गया है तो उसकी माँ ने बहुत समझाया पर अजय पीछे हटने के लिए तैयार नहीं था। मां उसे रोते हुए घर के लिए रवाना हो गई।
प्रवेश के पहले तीन माह बहुत कठिन होते हैं उसके बाद आसानी से काम होते हैं। कैडिट तीन माह निकलने के बाद जिंदगी भर इसे छोड़ने के लिए तैयार नहीं होता है। यहां के कठोर प्रशिक्षण के कारण मां मुझे यहां पर कभी भी भेजने के लिए सहमत नहीं थी। वहां से फोन पर बात करने का एक दिन मिलता था उसमें भी चार मिनट से अधिक बात नहीं करने देते थे। मुझे घर की बहुत याद आती है।

अचानक मुझे याद आया आज मेरी नाइट डुयुटी है इसलिए मैं यादों से आज में आकर अपनी डुयुटी पर जाने की तैयारी करने लग गया। मैं यादों से हकीकत में आ गया। मुझे आज रात के समय सभी चौकियों की जानकारी लेना था। अचानक बहुत तेज धमाका हुआ। धमाका इतना तेज था मेरे टेबल के सारे सामान नीचे गिर चुके थे। मैने तेजी से बहार जाकर देखा, गाड़ी के परखचे उड़ गये थे। ड्राइवर व सहायक खाड़ी से नीचे जाकर गिरे हुए थे। चारों तरफ सैनिकों ने अपनी पोजिशन को संभाल रखी थी। कुछ सैनिक घायलों को लेकर स्वास्थ्य केन्द्र लें जा रहे थे। कुछ समय के बाद आंतकवादियों को पकड़ लिया वह पड़ोसी देश के थे।
"यारों हम कहां से कहाँ आ गये"

दोस्तों आज के वक्त की कड़वी सच्चाई है हमें नदी तालाब में नहाने में शर्म महसूस होती है पर स्विमिंग पुल में तैरने को हम आज की जरुरत कहते हैं।
हम गरीब को एक रुपया दान देने में हिचकिचाहट महसूस करते हैं लेकिन होटल में वेटर को टिप्स देने पर गर्व की अनुभूति महसूस करते हैं।
हम अपने माता पिता को एक गिलास पानी पिलाने में ततकलीफ़ महसूस करते हैं लेकिन हम नेताओं को देखकर उनके आगे वेटर बनने पर गर्व महसूस करते हैं।
आज की महिलाओं को बड़ों के सामने सिर ढकने में शर्मिंदगी का एहसास होता है। लेकिन मिट्टी से बचने के लिए सब कुछ करने को तैयार हो जाती है, आज की लड़कियों को मुंह छिपाने में तकलीफ़ नहीं होती है।

आजकल पंगत में बैठकर खाना दकियानूसी लगता है। और पार्टियों में खाने के लिए लाइन में खड़ा होना अच्छा लगता है।
दोस्तों आज के वक्त में मां या बहन कोई मांग करें तो हमें फिजूलखर्ची लगता है लेकिन हमारी प्रेमिका मांग करें तो यह हमें अपना सौभाग्य लगता है।
आज के वक्त में हमें गरीब व्यक्तियों से सब्जियां खरीदना अपमानजनक महसूस होता है लेकिन शोपिग मॅाल में अअधिक पैसा खर्च करना गौरवान्वित करता है।
आज के वक्त में हम पिताजी के देहांत पर सिर मुंडवाने पर शर्मिंदगी महसूस करते हैं लेकिन जब फैशन के लिए गजनी लुक देना होता है तो हमें गर्व महसूस होता है।
अगर कोई पंडित चोटी रखता है तो हम उसकी मजाक बनाते हैं लेकिन फिल्म स्टार ऐसा करते हैं तो हम उनके दीवाने हो जाते हैं।
किसानों द्वारा दिया गया अनाज में अच्छा नहीं लगता है लेकिन विदेशी कंपनियां उसी अनाज को पोलिस करके अधिक मूल्य में देती है तो हमें अच्छा लगने लग जाता है। जब हम अपनी सोच बदलेंगे तभी देश बदल सकता है। मर्जी हमारी है हमें क्या करना है।











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